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फिर एक शाम

Posted On: 28 Jan, 2017 में

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मालूम है ये हालात यूं खफा है, तुझसे और मुझसे,
फिर भी तेरे साथ एक शाम सजाना चाहता हूँ ,
करें लाख कोशिशें मिटती नहीं हाथ की लकीरें,
तेरे दिल से अपनी यादों का दर्द चुराना चाहता हूँ,

लाख मिटाये ना मिटे तेरी याद दिल से,
तेरी आँखों से सूखे अशकों को बहाना चाहता हूँ,
मुमकिन नहीं होता अमावश को चाँद का दीदार,
पर मैं तुझे फिर से आजमाना चाहता हूँ,

थम जाए वक्त ठहर जाए शामें,
फिर तेरे ख्वाबों मे एक शाम सजाना चाहता हूँ,
थी लाख तमन्नाएँ तेरे संग ए सफर बनने की,
अब तो बस एक शाम सजाना चाहता हूँ,

बढ़ा ले हाथ और थाम ले मुझको,
मैं आज फिर अपने आँसू बहाना हूँ,
लाख मिटाये ना मिटे तेरी याद दिल से,
फिर तेरे साथ एक शाम सजाना चाहता हूँ ,



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